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समाचार

झारखंड : क्षेत्र कृषक मित्र को स्थानीय पौध विशेषज्ञों के रूप में उन्हें विकसित करने के लिए प्रशिक्षण

CCKN-IA परियोजना के अंतर्गत, झारखण्ड राज्य के दो जिले पूर्वी सिंघ्भूम और रांची के ४१ कृषक मित्रों की ३ दिवसीय अवसिये प्रशिक्षण दिया गया| यह प्रशिक्षण १७ से २२ अगस्त २०१५ के बीच हुआ जिसका उद्देश्य कृषक मित्रों को स्थानीय पौध विशेषज्ञों के रूप में विकसित करना था| कृषक मित्रों को […]

ओडिशा: कंटेंट प्रबंधन पर विषय विशेषज्ञों को CCKN-IA के अंतर्गत NICE प्लेटफार्म पर प्रशिक्षण

रचनाकारों और प्रमाणकों , अनुवादकों और ब्लॉक स्तर पर प्रबंधकों को मिलाकर बनाई हुई कंटेंट प्रबंधन टीम की पहचान की गई और CCKN-IA के अंतर्गत नामित किआ गया और उन्हें NICE प्लेटफार्म को इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया| साथ ही कंटेंट बनाने और मौसम की जानकारी की सूचना […]

महाराष्ट्र: मानसून में वापसी की जल्दबाजी

मानसून में वापसी की जल्दबाजी आईआईटीएम आईएमडी के पूर्वानुमान अनुसार मानसून 15 दिनों के तय समय से पहले राज्य से निकल जायेगा मानसून के आखिरी महीने में अच्छी बारिश होने के जो असार थे वो भी अब ख़तम हो गए! सधार्ताया मानसून की वापसी पश्चमी राजस्थान से १ सितम्बर के […]

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पृष्ठभूमि

farmer irrigates कृषि प्रणालियाँ जलवायु की अत्यधिक घटनाओं के कारण संवेदनशील हैं। अंतर सरकारी पैनल (IPCC) की जलवायु परिवर्तन पर ताजा रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकलता है कि गर्मी तनाव, सूखे और बाढ़ की बढ़ी हुई आवृत्ति का नकारात्मक प्रभाव फसलों की पैदावार और पशुओं पर पड़ता है। बदलती जलवायु के लक्षण जैसे सूखा, बाढ़,मानसून का देरी से आरम्भ ,शुष्क दौर और गर्म तरंगों से कृषि गतिविधियों में व्यवधान पड़ता है जिससे काफी संकट पैदा हो जाता है।
जलवायु परिवर्तन से बदलने वाली स्थितियों से किसानों विशेषकर छोटे और निम्न मध्यमवर्गीय किसान, की आजीविका पर गहरा असर पड़ता है। अपेक्षित उत्तमता को प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावशाली अनुकलन के लिए अनिवार्यक परामर्श को यथासमय पाने के लिए बदलती सामाजिक आर्थिक कृषि परिस्थितियों , आजीविका प्रणाली और उससे सबंधित संकटों को जानना अनिवार्य है ।
इसी लिए मौजूदा कृषि ज्ञान और सूचना नेटवर्क (AKINS) को सुधारना और इसे अधिक गतिशील बनाना एवम सभी हितधारकों (राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नीति निर्माताओं, विस्तार एजेंटों, बिचौलियों, और किसानों, आदि ) के योग्य बनाना अति महत्वपूर्ण है ।
यह उल्लेखनीय है कि इस परियोजना द्वारा विकसित तकनीकें , क्षमताएँ और संस्थागत माडल विशेष रूप से न केवल स्थायी कृषि पर राष्ट्रीय मिशन, कृषि मंत्रालय , भारत सरकार से ही नही बल्कि अन्य कार्यक्रमों और संस्थाओं से भी संबंधित होगी ।

कृषि से जुड़े तथ्य

  • - 2000 और 2002 में पड़े सूखे से ओडिशा में लगभग 1.1 करोड़ लोग प्रभावित हुए
  • - 2009 में, मानसून के देर से आने और अनियमित वर्षा से 5.7 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित हुआ
  • - तापमान में लगभग 2 डिग्री की वृद्धि संभावित अनाज की पैदावार कम कर देती है
  • - यह स्पष्ट होगा कि वर्षा निर्भर कृषि में जलवायु परिवर्तन के कारण पैदावार में कमी आती है
  • - भारत में लगभग 85% छोटे किसान है और उनमें से 60% से अधिक वर्षा पर आधारित कृषि पर निर्भर हैं
  • - जलवायु परिवर्तन खाद्य सुरक्षा और आजीविका को प्रभावित करेगा और साथ ही साथ प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा।

परियोजना

Photo_5कृषि मंत्रालय की परियोजना "भारतीय कृषि में जलवायु परिवर्तन ज्ञान नेटवर्क" [Climate Change Knowledge Network in Indian Agriculture (CCKN-IA)] को Deutsche Gesellschaftfür Internationale Zusammenarbeit (GIZ) के तकनीकी सहयोग से लागू किया जा रहा है। Deutsche Gesellschaft für Internationale Zusammenarbeit (GIZ) GmbH जर्मन सरकार के स्वामित्व का उपक्रम है। GIZ जर्मनी और अन्य भागीदारों हेतु अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग द्वारा निरंतर होने वाले विकास को लागू करता है।
सफल परिपालन और इच्छित परिणामों की सुनिश्चिता हेतु इस परियोजना को GOPA के सलाहकारों का समर्थन प्राप्त है।

CCKN-IA कार्यक्रम का उद्देश्य एक प्रायोगिक आधार पर चयनित तीन भारतीय राज्यों में हितधारकों के लिए ज्ञान का एक मजबूत नेटवर्क विकसित करना है।यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि किसानों , विस्तृत सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं को मिलने वाली जानकारी आधुनिक, समयानुसार , विश्वसनीय और स्थिति अनुसार हो ताकि वे बदलती जलवायु के अनुकूल किसानो को बेहतर तैयार कर सकें । इस तरह के सामूहिक प्रयास वास्तविक किसानों की जरूरतों को पूरा करने में योगदान देते हैं और एक बहुविध दोहरी विनिमय प्रक्रिया प्रदान करती है। CCKN-IA सार्वजनिक और निजी संसाधनों की क्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाने और दोनों के सेवा वितरण में सुधार लाने के लिए सक्षम है।

यह परियोजना सितंबर 2013 में शुरू हुई और यह दो चरणों में है:

  1. स्थापना चरण
  2. तीन साल का परिपालन चरण

चरणबद्ध परियोजना का क्रियान्वयन परियोजना से सम्बंधित सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करती है ।

भागीदार

  • - तीनों प्रोजेक्ट राज्यों के कृषि विभाग
  • - कृषि विश्वविद्यालय
  • - राज्य कृषि प्रबंधन और विस्तृत प्रशिक्षण संसथान (SAMETI)
  • - कृषि विज्ञानं केंद्र (KVK)
  • - मौसम सेवा विभाग
  • - स्वयं सहायक समूह, किसान समूह , ग्रामीण युवक, कृषक मित्र, मॉडल किसान
  • - गैर सरकारी संगठन
  • - निजी कंपनियां

हस्तक्षेप

  • - विभिन्न विशेषज्ञताओं को संघटित करना।
  • - मौजूदा कृषि ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण।
  • - मौजूदा मुख्य कृषि विस्तार प्रणाली को सशक्त और मजबूत करना।
  • - जलवायु अनुरूप कृषि को बढ़ावा देने की क्षमता में वृद्धि।
  • - कृषक समुदाय की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना।

मुख्य कार्यान्वयन भागीदार: कृषि मंत्रालय, भारत सरकार

परियोजना क्षेत्र

ज्ञान प्रबंधन प्रणाली

CCKN_IACCKN-IA ने इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी की एक मजबूत व्यवस्था विकसित की है जिसे NICE Network for Information on Climate (Ex)Change कहते है जो सतत कृषि के लिए किसानों को आधुनिक और उचित जानकारी को सामायिक रूप से प्रदान करती है । सूचना के स्रोत विभिन्न सरकारी संगठन हैं और विभिन्न प्रारूपों में है। जानकारी या विशेषज्ञ परामर्श को एकत्रित करना, जाँचना एवं विभिन्न प्रारूपों में जैसे मोबाइल मेसेज (sms), ध्वनि सन्देश,पोस्टर, वीडियो आदि द्वारा प्रसार करना है ताकि किसान सही समय पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से कृषि को बचा सके । यह प्रणाली पूर्ण रूप से ओपन सोर्स तकनीकों पर आधारित है और इसका प्रयोग वेब और एंड्राइड आधारित मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा किया जा सकता है।

परियोजना व्यवधान

CCKN-IA ने सेमेंटिक वेब तकनीकों का प्रयोग करके एक ओपन सोर्स वेब समाधान बनाया है जिसे NICE (Network for Information on Climate (Ex) change) (जलवायु (पूर्व) परिवर्तन के बारे में जानकारी के लिए नेटवर्क) कहते हैं । NICE विभिन्न विषय के विशेषज्ञों जैसे मौसम, कृषि विज्ञान, कृषि विस्तार एवं अन्य को एक ICT मंच प्रदान करता है जहाँ वो जानकारी का आदान प्रदान एवं उपयोग कर स्थानीय जलवायु सम्बंधित सही परामर्श दे सकें। ICT की यह व्यवस्था जानकारी का निरंतर सुधार करने में मदद करता है। साथ ही साथ विभिन्न तकनीकों का उपयोग कर दो तरफा संचार को बढ़ावा देता है जिससे विशेषज्ञों को स्थानीय किसानों की कृषि संबंधित जरूरतों से सक्षम रूप से जोड़ा जा सके। NICE की टेबलेट एप्लीकेशन कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाता है ताकि वे स्थानीय किसानों तक परामर्श और सहायता सही ढंग से पहुंचा सके। इसके अलावा संस्थागत प्रणालियों की परियोजना का काम मौजूदा विस्तार प्रणाली, विशेषज्ञों की क्षमताओं और प्रभावी विकास की देख रेख की प्रणाली,किसानो के उचित परामर्श के प्रचार प्रसार और अपनाने की क्रिया को पुन: जीवित करता है। अभी तक कृषि विज्ञान, पशुधन प्रबंधन, मिट्टी एवम जल संरक्षण और ऐसे कई डोमेनो में से 100 से अधिक विशेषज्ञों को चुना जा चुका है और उन्हें किसानो को मिलने वाले स्थानीय परामर्श को विकसित और प्रसारित के लिए NICE के मंच को उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। किसान और कृषि विस्तार कार्यकर्ता स्थानीय किसानों की जरूरतों को सही समय पर विशेषज्ञों तक पहुँचातें हैं ताकि उत्तम स्थानीय परामर्श का निर्माण हो सके। यह परियोजना भारत के तीन राज्यों के लगभग 22000 किसानो को जोड़ती है।100 से अधिक चुने हुए और प्रशिक्षित कृषि विस्तार कार्यकर्ता टेबलेट का उपयोग न केवल किसानों को सलाह देने में करते हैं बल्कि किसानों से उनकी प्रतिक्रिया और प्रश्न इक्कठे करने में भी करते है। CCKN-IA स्थानीय कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं को कीट और रोग प्रबंधन के स्थानीय सलाहकार के रूप में समर्थ बनाने का प्रशिक्षण देती है और सहायता भी करती है।