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समाचार

फसल की खेती या निर्माण – आंध्र प्रदेश में कठिन चुनाव

निर्माण उद्योग की मांगों को पूरा करने के लिए अत्यधिक रेत उत्खनन, अनंतपुर में स्थानीय सिंचाई प्रणाली को नष्ट कर रहा है। कौन से प्रबल होगा – कृषि या निर्माण? 1 99 0 के दशक में लोगों की अधिक मांगों और उनके घरों की मांगों के कारण निर्माण उद्योग तेजी […]

पारिस्थितिकी के अनुकूल प्रौद्योगिकियां चावल के उत्पादन में बेहतर परिणाम लाती हैं

किसान बिना किसी रसायन के फसल उगाने में सक्षम थे। खेतों में न कोई कीट और न ही कोई बीमारी के लक्षण थे । कुत्तानड, जिसे केरल के चावल का भंडार भी कहा जाता है, एक अद्वितीय पारिस्थितिक रूप से नाजुक जैव-भौगोलिक इकाई है जो ज्यादातर केरल के अलापुज़हा जिले […]

CCKNIA और UPNRM द्वारा लाइवलीहुड एशिया सम्मेलन 2015 में प्रदर्शन

ऐक्सेस डेवेलपमेंट सर्विसेज (एक भारतीय गैर-लाभकारी संगठन) द्वारा 10 दिसंबर और 11 दिसंबर, 2015 को नई दिल्ली में जीवनी एशिया शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। एक अनूठा मंच था जो गरीबों की जीवनयापन में वृद्धि पर दक्षिण-दक्षिण वार्ता की सुविधा देता है, शिखर सम्मेलन में देखा गया कि निजी […]

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पृष्ठभूमि

farmer irrigatesकृषि प्रणालियों चरम जलवायु घटनाओं के प्रति संवेदनशील हैं जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) की हाल की रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला गया है कि गर्मी तनाव, सूखे और बाढ़ की वृद्धि हुई आवृत्ति, फसल की पैदावार और पशुओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। सूखे, बाढ़, मॉनसून की शुरुआत में देरी, आंतरायिक सूखे की मार, और गर्म तरंगें - बदलते जलवायु के लक्षण - कृषि गतिविधियों में व्यवधान के कारण होता है जिससे गंभीर संकट हो रहा है।

जलवायु परिस्थितियों में इस बदलाव से किसानों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका पर प्रभाव बढ़ रहा है। विभिन्न सामाजिक-आर्थिक, कृषि-पारिस्थितिक, आजीविका प्रणालियों और संबंधित जोखिम, जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूल, अनुकूलन के लिए गुणवत्ता, समय पर और स्थानीय परामर्श की उपलब्धि और पहुंच को समझते हैं। इसलिए, मौजूदा कृषि ज्ञान और सूचना नेटवर्क (ADINS) को सुधारना महत्वपूर्ण है। और इसे और अधिक गतिशील और सभी हितधारकों (राष्ट्रीय और राज्य स्तर, विस्तार एजेंटों, मध्यस्थों, और किसानों आदि पर नीति निर्माताओं) के लिए प्रासंगिक बनाना आवश्यक हैं। इस पर विचार किया गया है कि परियोजना द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी, क्षमताओं और संस्थागत मॉडल न केवल कृषि, कृषि मंत्रालय के राष्ट्रीय मिशन पर मुख्यधारा की जाएगी। भारत सरकार; लेकिन अन्य संबंधित कार्यक्रम और संस्थानों में भी।

कृषि से जुड़े तथ्य

  • - ओडिशा में 2000 और 2002 में लगभग 11 मिलियन सूखा प्रभावित हुए
  • - 2009 में, मानसून के देर से आगमन और अनिश्चित वर्षा 5.7 मिलियन से प्रभावित
  •  - लगभग 2 डिग्री तक तापमान में वृद्धि संभावित अनाज पैदावार को कम कर देता है
  • - वर्षा कृषि के लिए जलवायु परिवर्तन के कारण पैदावार में कटौती अधिक स्पष्ट होगी
  • - भारत में लगभग 85% सीमांत और छोटे किसान हैं और उनमें से 60% से अधिक बारिश वाली खेती पर निर्भर हैं
  • - जलवायु परिवर्तन खाद्य सुरक्षा, आजीविका पर प्रभाव डालकर प्राकृतिक संसाधनों पर तनाव डाल देगा

परियोजना

Photo_5कृषि मंत्रालय की परियोजना "भारतीय कृषि में जलवायु परिवर्तन ज्ञान नेटवर्क" [Climate Change Knowledge Network in Indian Agriculture (CCKN-IA)] को Deutsche Gesellschaftfür Internationale Zusammenarbeit (GIZ) के तकनीकी सहयोग से लागू किया जा रहा है। Deutsche Gesellschaft für Internationale Zusammenarbeit (GIZ) GmbH जर्मन सरकार के स्वामित्व का उपक्रम है। GIZ जर्मनी और अन्य भागीदारों हेतु अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग द्वारा निरंतर होने वाले विकास को लागू करता है।
सफल परिपालन और इच्छित परिणामों की सुनिश्चिता हेतु इस परियोजना को GOPA के सलाहकारों का समर्थन प्राप्त है।

CCKN-IA कार्यक्रम का उद्देश्य एक प्रायोगिक आधार पर चयनित तीन भारतीय राज्यों में हितधारकों के लिए ज्ञान का एक मजबूत नेटवर्क विकसित करना है।यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि किसानों , विस्तृत सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं को मिलने वाली जानकारी आधुनिक, समयानुसार , विश्वसनीय और स्थिति अनुसार हो ताकि वे बदलती जलवायु के अनुकूल किसानो को बेहतर तैयार कर सकें । इस तरह के सामूहिक प्रयास वास्तविक किसानों की जरूरतों को पूरा करने में योगदान देते हैं और एक बहुविध दोहरी विनिमय प्रक्रिया प्रदान करती है। CCKN-IA सार्वजनिक और निजी संसाधनों की क्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाने और दोनों के सेवा वितरण में सुधार लाने के लिए सक्षम है।

यह परियोजना सितंबर 2013 में शुरू हुई और यह दो चरणों में है:

  1. स्थापना चरण
  2. तीन साल का परिपालन चरण

चरणबद्ध परियोजना का क्रियान्वयन परियोजना से सम्बंधित सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करती है ।

Strategy

- Leverage the diverse expertise
- Integration of existing agriculture knowledge systems
- Strengthen and build on the existing agricultural extension systems
- Increase efficiency in promoting climate resilient agriculture
- Promote active participation and engagement of farming communities

Partners

- Department of Agriculture in three partner States
- Agriculture Universities
- State Agriculture Management and Extension Training Institutes (SAMETI)
- Krishi Vigyan Kendras (KVK)
- Indian Metereologic Department (IMD)
- Self-help groups, farmer groups, krishak mitras, model farmers
- NGOs
- Private Companies

मुख्य कार्यान्वयन भागीदार: कृषि मंत्रालय, भारत सरकार

परियोजना क्षेत्र

ज्ञान प्रबंधन प्रणाली

CCKN_IACCKN-IA ने इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी की एक मजबूत व्यवस्था विकसित की है जिसे NICE Network for Information on Climate (Ex)Change कहते है जो सतत कृषि के लिए किसानों को आधुनिक और उचित जानकारी को सामायिक रूप से प्रदान करती है । सूचना के स्रोत विभिन्न सरकारी संगठन हैं और विभिन्न प्रारूपों में है। जानकारी या विशेषज्ञ परामर्श को एकत्रित करना, जाँचना एवं विभिन्न प्रारूपों में जैसे मोबाइल मेसेज (sms), ध्वनि सन्देश,पोस्टर, वीडियो आदि द्वारा प्रसार करना है ताकि किसान सही समय पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से कृषि को बचा सके । यह प्रणाली पूर्ण रूप से ओपन सोर्स तकनीकों पर आधारित है और इसका प्रयोग वेब और एंड्राइड आधारित मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा किया जा सकता है।

परियोजना व्यवधान

CCKN-IA ने सेमेंटिक वेब तकनीकों का प्रयोग करके एक ओपन सोर्स वेब समाधान बनाया है जिसे NICE (Network for Information on Climate (Ex) change) (जलवायु (पूर्व) परिवर्तन के बारे में जानकारी के लिए नेटवर्क) कहते हैं । NICE विभिन्न विषय के विशेषज्ञों जैसे मौसम, कृषि विज्ञान, कृषि विस्तार एवं अन्य को एक ICT मंच प्रदान करता है जहाँ वो जानकारी का आदान प्रदान एवं उपयोग कर स्थानीय जलवायु सम्बंधित सही परामर्श दे सकें। ICT की यह व्यवस्था जानकारी का निरंतर सुधार करने में मदद करता है। साथ ही साथ विभिन्न तकनीकों का उपयोग कर दो तरफा संचार को बढ़ावा देता है जिससे विशेषज्ञों को स्थानीय किसानों की कृषि संबंधित जरूरतों से सक्षम रूप से जोड़ा जा सके। NICE की टेबलेट एप्लीकेशन कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाता है ताकि वे स्थानीय किसानों तक परामर्श और सहायता सही ढंग से पहुंचा सके। इसके अलावा संस्थागत प्रणालियों की परियोजना का काम मौजूदा विस्तार प्रणाली, विशेषज्ञों की क्षमताओं और प्रभावी विकास की देख रेख की प्रणाली,किसानो के उचित परामर्श के प्रचार प्रसार और अपनाने की क्रिया को पुन: जीवित करता है। अभी तक कृषि विज्ञान, पशुधन प्रबंधन, मिट्टी एवम जल संरक्षण और ऐसे कई डोमेनो में से 100 से अधिक विशेषज्ञों को चुना जा चुका है और उन्हें किसानो को मिलने वाले स्थानीय परामर्श को विकसित और प्रसारित के लिए NICE के मंच को उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। किसान और कृषि विस्तार कार्यकर्ता स्थानीय किसानों की जरूरतों को सही समय पर विशेषज्ञों तक पहुँचातें हैं ताकि उत्तम स्थानीय परामर्श का निर्माण हो सके। यह परियोजना भारत के तीन राज्यों के लगभग 22000 किसानो को जोड़ती है।100 से अधिक चुने हुए और प्रशिक्षित कृषि विस्तार कार्यकर्ता टेबलेट का उपयोग न केवल किसानों को सलाह देने में करते हैं बल्कि किसानों से उनकी प्रतिक्रिया और प्रश्न इक्कठे करने में भी करते है। CCKN-IA स्थानीय कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं को कीट और रोग प्रबंधन के स्थानीय सलाहकार के रूप में समर्थ बनाने का प्रशिक्षण देती है और सहायता भी करती है।